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दलित महिलाओं पर हिंसा, व्यवस्था की विफलता और न्याय के लिए कठिन संघर्ष

बीते दिनों उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में, अपहरणकर्ताओं से अपनी बेटी को बचाने की कोशिश में एक 50 वर्षीय दलित महिला के सिर पर धारदार हथियार से हमला किया गया, जिसके बाद इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई।
दलित महिलाओं पर हिंसा, व्यवस्था की विफलता और न्याय के लिए कठिन संघर्ष
बीते दिनों उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में, अपहरणकर्ताओं से अपनी बेटी को बचाने की कोशिश में एक 50 वर्षीय दलित महिला के सिर पर धारदार हथियार से हमला किया गया, जिसके बाद इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई।
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January 22, 2026 at 12:30 AM
रेप कल्चर की राजनीति: नेताओं के बयान, मीडिया की चुप्पी और सर्वाइवर का संघर्ष

भारत में बलात्कार के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। यह केवल एक अपराध तक सीमित नहीं रहें है, बल्कि यह राजनीति का सबसे शक्तिशाली टूल बन चुके हैं। हमारे पितृसत्तात्मक समाज में रुढ़िवादी मानसिकता वाले लोग और नेता इसे जाति, धर्म,…
रेप कल्चर की राजनीति: नेताओं के बयान, मीडिया की चुप्पी और सर्वाइवर का संघर्ष
भारत में बलात्कार के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। यह केवल एक अपराध तक सीमित नहीं रहें है, बल्कि यह राजनीति का सबसे शक्तिशाली टूल बन चुके हैं। हमारे पितृसत्तात्मक समाज में रुढ़िवादी मानसिकता वाले लोग और नेता इसे जाति, धर्म, कपड़ों, समय या गलती से जोड़कर सर्वाइवर को ही दोषी ठहरा देते हैं।  
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January 21, 2026 at 12:45 AM
तलाक की लंबी न्यायिक प्रक्रिया और महिलाओं पर उसका असमान बोझ

साल 2013 में के. श्रीनिवास राव बनाम डी.ए. दीपा के मामले में न्यायालय ने स्पष्ट रूप से माना कि लंबी और कष्टदायक मुकदमेबाजी अपनेआप में मानसिक क्रूरता हो सकती है। यही तर्क उन व्यवस्थागत देरी पर भी लागू होना चाहिए, जिन्हें कभी-कभी न्यायिक…
तलाक की लंबी न्यायिक प्रक्रिया और महिलाओं पर उसका असमान बोझ
साल 2013 में के. श्रीनिवास राव बनाम डी.ए. दीपा के मामले में न्यायालय ने स्पष्ट रूप से माना कि लंबी और कष्टदायक मुकदमेबाजी अपनेआप में मानसिक क्रूरता हो सकती है। यही तर्क उन व्यवस्थागत देरी पर भी लागू होना चाहिए, जिन्हें कभी-कभी न्यायिक प्रक्रिया स्वयं बढ़ावा देती है।
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January 21, 2026 at 12:30 AM
भारतीय क्वीयर-फेमिनिस्ट कलाकारों की कला, स्मृति और प्रतिरोध की यात्रा 

क्वीयर-फेमिनिस्ट कला केवल प्रतिनिधित्व की मांग नहीं करती, बल्कि वह देखने, समझने और याद रखने के तरीकों को चुनौती देती है। यह कला किसी एक कैनवस, किसी गैलरी या किसी तयशुदा फ्रेम में क़ैद नहीं रहती। यह दीवारों से निकलकर सड़कों पर…
भारतीय क्वीयर-फेमिनिस्ट कलाकारों की कला, स्मृति और प्रतिरोध की यात्रा 
क्वीयर-फेमिनिस्ट कला केवल प्रतिनिधित्व की मांग नहीं करती, बल्कि वह देखने, समझने और याद रखने के तरीकों को चुनौती देती है। यह कला किसी एक कैनवस, किसी गैलरी या किसी तयशुदा फ्रेम में क़ैद नहीं रहती। यह दीवारों से निकलकर सड़कों पर आती है, शरीर के भीतर उतरती है और रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन जाती है।
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January 20, 2026 at 12:45 AM
भोजन की राजनीति में महिलाओं के श्रम की अनदेखी और सीमित आज़ादी

राजनीति में भी भोजन हमेशा एक बड़ा मुद्दा रहा है। कभी इसे जाति की राजनीति से जोड़ा जाता है, तो कभी धर्म से। लेकिन बहुत कम बार यह सवाल उठता है कि हम जो भोजन खा रहे हैं, वह कैसे बन रहा है, किसके लिए बन रहा है और उसे बनाने वाला कौन है।
भोजन की राजनीति में महिलाओं के श्रम की अनदेखी और सीमित आज़ादी
राजनीति में भी भोजन हमेशा एक बड़ा मुद्दा रहा है। कभी इसे जाति की राजनीति से जोड़ा जाता है, तो कभी धर्म से। लेकिन बहुत कम बार यह सवाल उठता है कि हम जो भोजन खा रहे हैं, वह कैसे बन रहा है, किसके लिए बन रहा है और उसे बनाने वाला कौन है।
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January 20, 2026 at 12:30 AM
मेरा फेमिनिस्ट जॉय: अपने शरीर को अपनाने की मेरी राजनीतिक कदम

मैंने यह सीखा है कि मेरे शरीर पर सबसे पहला और आख़िरी अधिकार सिर्फ़ मेरा है। मुझे तय करना है कि मैं क्या करूँगी और क्या नहीं। और अगर मैं कुछ भी नहीं करना चाहती, तो वह भी मेरा ही फ़ैसला है। यही मेरा फेमिनिस्ट जॉय है। अपने शरीर पर अपना…
मेरा फेमिनिस्ट जॉय: अपने शरीर को अपनाने की मेरी राजनीतिक कदम
मैंने यह सीखा है कि मेरे शरीर पर सबसे पहला और आख़िरी अधिकार सिर्फ़ मेरा है। मुझे तय करना है कि मैं क्या करूँगी और क्या नहीं। और अगर मैं कुछ भी नहीं करना चाहती, तो वह भी मेरा ही फ़ैसला है। यही मेरा फेमिनिस्ट जॉय है। अपने शरीर पर अपना अधिकार।
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January 19, 2026 at 12:46 AM
‘परफेक्ट फैमिली’: आदर्श परिवार की परतें खोलती एक संवेदनशील कहानी 

साल 2025 में यूट्यूब पर रिलीज हुई वेब सीरीज 'परफेक्ट फैमिली’ आठ एपिसोड की यह श्रृंखला पूरी तरह से एक थेरेपी सेशन के इर्द-गिर्द सिमटी हुई है। यह सीरीज इसलिए खास है, क्योंकि यह आदर्श परिवार के उस खोल को उतार फेंकती है, जिसे हम समाज के…
‘परफेक्ट फैमिली’: आदर्श परिवार की परतें खोलती एक संवेदनशील कहानी 
साल 2025 में यूट्यूब पर रिलीज हुई वेब सीरीज 'परफेक्ट फैमिली’ आठ एपिसोड की यह श्रृंखला पूरी तरह से एक थेरेपी सेशन के इर्द-गिर्द सिमटी हुई है। यह सीरीज इसलिए खास है, क्योंकि यह आदर्श परिवार के उस खोल को उतार फेंकती है, जिसे हम समाज के सामने ओढ़े रहते हैं।
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January 19, 2026 at 12:30 AM
झांसी की महिला ऑटो चालक की हत्या और असंगठित क्षेत्र में महिला सुरक्षा का सवाल

झांसी की पहली महिला ऑटो रिक्शा चालक अनीता चौधरी की हत्या ने देश में महिला सुरक्षा पर बहस छेड़ दी है। उत्तर प्रदेश की इस घटना ने असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था की ख़ामियों को उजागर करने का…
झांसी की महिला ऑटो चालक की हत्या और असंगठित क्षेत्र में महिला सुरक्षा का सवाल
झांसी की पहली महिला ऑटो रिक्शा चालक अनीता चौधरी की हत्या ने देश में महिला सुरक्षा पर बहस छेड़ दी है। उत्तर प्रदेश की इस घटना ने असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था की ख़ामियों को उजागर करने का भी काम किया है।
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January 16, 2026 at 12:46 AM
रति बार्थोलोम्यू: भारतीय रंगमंच में स्त्री दृष्टि और प्रतिरोध की सशक्त आवाज़| #IndianWomenInHistory

थिएटर परंपरा को मज़बूती देने वालों में रति बार्थोलोम्यू का नाम बहुत सम्मान के साथ लिया जाता है। वह एक निर्देशक, अभिनेत्री, नाटककार और बुद्धिजीवी रंगमंच कलाकार थीं ।
रति बार्थोलोम्यू: भारतीय रंगमंच में स्त्री दृष्टि और प्रतिरोध की सशक्त आवाज़| #IndianWomenInHistory
थिएटर परंपरा को मज़बूती देने वालों में रति बार्थोलोम्यू का नाम बहुत सम्मान के साथ लिया जाता है। वह एक निर्देशक, अभिनेत्री, नाटककार और बुद्धिजीवी रंगमंच कलाकार थीं ।
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January 16, 2026 at 12:30 AM
खास बात: हिंदी लेखिका और साहित्य समीक्षक हेमलता महिश्वर से 

चेतना का आधार तो डॉक्टर अंबेडकर का चिंतन है। वहां से हम लोग अपना आधार लेते हैं। जो मनुष्यता को निर्मित करने पर केंद्रित है। निश्चित तौर पर हमारा जो समाज है। वो विभिन्न तरह के खांचों में बंटा हुआ है और आज भी उस खांचे की जो खाई है, वो हम…
खास बात: हिंदी लेखिका और साहित्य समीक्षक हेमलता महिश्वर से 
चेतना का आधार तो डॉक्टर अंबेडकर का चिंतन है। वहां से हम लोग अपना आधार लेते हैं। जो मनुष्यता को निर्मित करने पर केंद्रित है। निश्चित तौर पर हमारा जो समाज है। वो विभिन्न तरह के खांचों में बंटा हुआ है और आज भी उस खांचे की जो खाई है, वो हम दूर नहीं कर पाए हैं।
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January 15, 2026 at 12:46 AM
केयर वर्क और पेरेंटहुड पर जरूरी सवाल खड़े करती मजेदार सीरीज़ है ‘सिंगल पापा’

जब बॉलीवुड और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर ज़्यादातर पिता-पुत्र की कहानियां भी मर्दानगी और ताक़त के इर्द-गिर्द घूमती हैं, वहीं 'सिंगल पापा' एक मर्द को संवेदनशील, डरे हुए और बच्चे की देखभाल में जूझते हुए दिखाने की कोशिश अच्छी कर …
केयर वर्क और पेरेंटहुड पर जरूरी सवाल खड़े करती मजेदार सीरीज़ है ‘सिंगल पापा’
जब बॉलीवुड और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर ज़्यादातर पिता-पुत्र की कहानियां भी मर्दानगी और ताक़त के इर्द-गिर्द घूमती हैं, वहीं 'सिंगल पापा' एक मर्द को संवेदनशील, डरे हुए और बच्चे की देखभाल में जूझते हुए दिखाने की कोशिश अच्छी कर  रही है।
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January 14, 2026 at 12:46 AM
शैक्षणिक संस्थानों में महिला गॉर्ड और महिला सफाई कर्मचारियों की जद्दोजहद

भारत में उच्च शिक्षा संस्थानों में कार्यरत महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। लेकिन कैंपस का माहौल, कई महिलाओं के लिए असुरक्षा, भेदभाव और मानसिक दबाव का केंद्र भी बन जाता है। कैंपस में काम करने वाली महिलाएं जेंडर आधारित…
शैक्षणिक संस्थानों में महिला गॉर्ड और महिला सफाई कर्मचारियों की जद्दोजहद
भारत में उच्च शिक्षा संस्थानों में कार्यरत महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। लेकिन कैंपस का माहौल, कई महिलाओं के लिए असुरक्षा, भेदभाव और मानसिक दबाव का केंद्र भी बन जाता है। कैंपस में काम करने वाली महिलाएं जेंडर आधारित भेदभाव, सुरक्षा चिंताओं और सामाजिक दबावों का सामना करती हैं।
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January 14, 2026 at 12:30 AM
‘अच्छी बेटी’ की बनने की राजनीति का खामियाजा उठाती भारतीय महिलाएं

साउथ एशियन थेरपिस्ट कलेक्टिव की एक रिपोर्ट बताती है कि दक्षिण एशियाई समाजों में लड़कियों को बचपन से ही ‘अच्छी बेटी’ बनने की ट्रेनिंग दी जाती है। परिवार और समाज उनसे उम्मीद करते हैं कि वे अपनी भावनाओं को दबाकर रखें। भारतीय सामाजिक…
‘अच्छी बेटी’ की बनने की राजनीति का खामियाजा उठाती भारतीय महिलाएं
साउथ एशियन थेरपिस्ट कलेक्टिव की एक रिपोर्ट बताती है कि दक्षिण एशियाई समाजों में लड़कियों को बचपन से ही ‘अच्छी बेटी’ बनने की ट्रेनिंग दी जाती है। परिवार और समाज उनसे उम्मीद करते हैं कि वे अपनी भावनाओं को दबाकर रखें। भारतीय सामाजिक ढांचे में ‘अच्छी बेटी’ की पहचान अक्सर परिवार की इज्जत से जोड़ दी जाती है।
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January 13, 2026 at 12:46 AM
सेक्स एजुकेशन के अभाव में क्वीयर समुदाय की बढ़ती असुरक्षाएं और चुनौतियां

डिजिटल तकनीक और ऑनलाइन डेटिंग ऐप्स ने क्वीयर समुदाय के लिए जुड़ाव, बातचीत और पहचान के नए अवसर खोले हैं, खासतौर पर, उस जगह पर जहां सार्वजनिक जीवन में क्वीयर अस्तित्व अब भी हाशिए पर है। लेकिन ये प्लेटफ़ॉर्म केवल संभावनाओं का…
सेक्स एजुकेशन के अभाव में क्वीयर समुदाय की बढ़ती असुरक्षाएं और चुनौतियां
डिजिटल तकनीक और ऑनलाइन डेटिंग ऐप्स ने क्वीयर समुदाय के लिए जुड़ाव, बातचीत और पहचान के नए अवसर खोले हैं, खासतौर पर, उस जगह पर जहां सार्वजनिक जीवन में क्वीयर अस्तित्व अब भी हाशिए पर है। लेकिन ये प्लेटफ़ॉर्म केवल संभावनाओं का विस्तार नहीं करते, बल्कि अपने साथ नई असुरक्षाएं और हिंसा भी लेकर आते हैं।
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January 13, 2026 at 12:30 AM
सोशल मीडिया पर दिखती ‘परफेक्ट शादियां’ और उसकी कीमत चुकाती महिलाएं

वेडिंग इंफ्लुएंसर संस्कृति इस दबाव को और सामान्य बना देती है। शादी अब निजी रिश्ता नहीं, एक मार्केटेबल इवेंट बन जाती है। दुल्हन का लुक, वेन्यू, डिज़ाइनर और फ़ोटोग्राफ़र सब टैग किए जाते हैं। भावनाएं भी कंटेंट बन जाती हैं। अक्सर यह…
सोशल मीडिया पर दिखती ‘परफेक्ट शादियां’ और उसकी कीमत चुकाती महिलाएं
वेडिंग इंफ्लुएंसर संस्कृति इस दबाव को और सामान्य बना देती है। शादी अब निजी रिश्ता नहीं, एक मार्केटेबल इवेंट बन जाती है। दुल्हन का लुक, वेन्यू, डिज़ाइनर और फ़ोटोग्राफ़र सब टैग किए जाते हैं। भावनाएं भी कंटेंट बन जाती हैं। अक्सर यह नहीं बताया जाता कि ये शादियां स्पॉन्सर्ड भी होती हैं।
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January 12, 2026 at 1:00 AM
कैंपस की चमक के पीछे सपनों के साथ निकली लड़कियां और असमानता का यथार्थ

संस्थानों में आंतरिक शिकायत समितियां और कानून मौजूद हैं, लेकिन उनकी पहुंच, संवेदनशीलता और भरोसेमंद प्रक्रिया पर सवाल बने रहते हैं। कई बार शिकायत करने पर सहयोग के बजाय चुप रहने की सलाह मिलती है, जो संस्थागत विफलता को उजागर करता…
कैंपस की चमक के पीछे सपनों के साथ निकली लड़कियां और असमानता का यथार्थ
संस्थानों में आंतरिक शिकायत समितियां और कानून मौजूद हैं, लेकिन उनकी पहुंच, संवेदनशीलता और भरोसेमंद प्रक्रिया पर सवाल बने रहते हैं। कई बार शिकायत करने पर सहयोग के बजाय चुप रहने की सलाह मिलती है, जो संस्थागत विफलता को उजागर करता है।
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January 12, 2026 at 12:45 AM
यह मन की उलझन कहीं ऊन का धागा तो नहीं? मानसिक स्वास्थ्य समस्या पर आधारित कहानी

तारो की शादी 13 साल की उम्र में कर दी गई थी। गरीबी, अधूरे सपनों और घर बनाने की जद्दोजहद, मज़ाक, ताने और बेरोज़गारी के बोझ ने उसके पति रामलाल को भी भीतर से तोड़ दिया था। पति की मौत के बाद तारो को समाज और परिवार हर जगह से…
यह मन की उलझन कहीं ऊन का धागा तो नहीं? मानसिक स्वास्थ्य समस्या पर आधारित कहानी
तारो की शादी 13 साल की उम्र में कर दी गई थी। गरीबी, अधूरे सपनों और घर बनाने की जद्दोजहद, मज़ाक, ताने और बेरोज़गारी के बोझ ने उसके पति रामलाल को भी भीतर से तोड़ दिया था। पति की मौत के बाद तारो को समाज और परिवार हर जगह से ताने मिले, लेकिन उसने हार नहीं मानी।
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January 12, 2026 at 12:30 AM
असोज और उत्तराखंड की महिलाओं पर अदृश्य श्रम का दोहरा भार 

पहाड़ में असोज सबसे ज्यादा काम का शारीरिक और मानसिक दबाव लेकर आता है, जिसका ज्यादातर दबाव महिलाओं के ऊपर होता है। यह वह समय है, जब खेती हो रही होती है,उसे समेटना,जानवरों के लिए घास काटना,उसके बाद हरी घास को काटकर सुखाना, जो कि बहुत ही कठिन…
असोज और उत्तराखंड की महिलाओं पर अदृश्य श्रम का दोहरा भार 
पहाड़ में असोज सबसे ज्यादा काम का शारीरिक और मानसिक दबाव लेकर आता है, जिसका ज्यादातर दबाव महिलाओं के ऊपर होता है। यह वह समय है, जब खेती हो रही होती है,उसे समेटना,जानवरों के लिए घास काटना,उसके बाद हरी घास को काटकर सुखाना, जो कि बहुत ही कठिन काम है। 
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January 9, 2026 at 12:46 AM
निर्मल कौर सैनी: भारतीय महिला वॉलीबॉल की पहली अंतरराष्ट्रीय आवाज़| #IndianWomenInHistory

निर्मल कौर वो महिला हैं, जिन्होंने भारतीय महिला वॉलीबॉल में नेतृत्व, दृढ़ता और सौम्यता की मिसाल पेश की थीं। निर्मल कौर सैनी का जीवन संघर्ष, मेहनत और उपलब्धियों से भरा रहा।
निर्मल कौर सैनी: भारतीय महिला वॉलीबॉल की पहली अंतरराष्ट्रीय आवाज़| #IndianWomenInHistory
निर्मल कौर वो महिला हैं, जिन्होंने भारतीय महिला वॉलीबॉल में नेतृत्व, दृढ़ता और सौम्यता की मिसाल पेश की थीं। निर्मल कौर सैनी का जीवन संघर्ष, मेहनत और उपलब्धियों से भरा रहा।
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January 9, 2026 at 12:30 AM
ग्रीन ब्यूटी का भ्रम और महिलाओं पर बढ़ता दबाव

औद्योगिक क्रांति के बाद सौंदर्य प्रसाधन एक ‘वस्तु’ बन गए। इन्हें बड़े पैमाने पर बनाया और बेचा जाने लगा। बीसवीं सदी में विज्ञापन उद्योग ने इन्हें उपभोक्तावाद से जोड़ दिया। यहीं से कॉस्मेटिक इंडस्ट्री और पर्यावरण प्रदूषण के बीच एक खतरनाक रिश्ता शुरू हुआ।
ग्रीन ब्यूटी का भ्रम और महिलाओं पर बढ़ता दबाव
औद्योगिक क्रांति के बाद सौंदर्य प्रसाधन एक ‘वस्तु’ बन गए। इन्हें बड़े पैमाने पर बनाया और बेचा जाने लगा। बीसवीं सदी में विज्ञापन उद्योग ने इन्हें उपभोक्तावाद से जोड़ दिया। यहीं से कॉस्मेटिक इंडस्ट्री और पर्यावरण प्रदूषण के बीच एक खतरनाक रिश्ता शुरू हुआ।
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January 8, 2026 at 12:46 AM
‘खूबसूरत’ : अनुशासन, प्रेम और आज़ादी के बीच संतुलन रचती एक संवेदनशील कहानी 

साल 1980 के दशक में, जब महिला पात्रों को अक्सर त्याग और चुप्पी का प्रतीक दिखाया जाता था, तब मंजू जैसी नायिका का सामने आना ज़रूरी था। वह परिवार को तोड़ती नहीं, बल्कि उसे मानवीय बनाती है। फिल्म यह संदेश देती है कि एक महिला…
‘खूबसूरत’ : अनुशासन, प्रेम और आज़ादी के बीच संतुलन रचती एक संवेदनशील कहानी 
साल 1980 के दशक में, जब महिला पात्रों को अक्सर त्याग और चुप्पी का प्रतीक दिखाया जाता था, तब मंजू जैसी नायिका का सामने आना ज़रूरी था। वह परिवार को तोड़ती नहीं, बल्कि उसे मानवीय बनाती है। फिल्म यह संदेश देती है कि एक महिला की आज़ादी परिवार के ख़िलाफ़ नहीं होती है।
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January 8, 2026 at 12:30 AM
आखिर क्यों एंटी-एजिंग उद्योग में महिलाओं की उम्र को एक समस्या बना दिया गया है?

आजकल सोशल मीडिया में भी एंटी-एजिंग क्रीम, सीरम, कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट और युवा बनाये रखने के वादों से भरे विज्ञापन यह संदेश देते हैं, कि झुर्रियां और सफेद बाल या उम्र का बढना सही नहीं है और इन्हें ठीक करने की ज़रूरत है।…
आखिर क्यों एंटी-एजिंग उद्योग में महिलाओं की उम्र को एक समस्या बना दिया गया है?
आजकल सोशल मीडिया में भी एंटी-एजिंग क्रीम, सीरम, कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट और युवा बनाये रखने के वादों से भरे विज्ञापन यह संदेश देते हैं, कि झुर्रियां और सफेद बाल या उम्र का बढना सही नहीं है और इन्हें ठीक करने की ज़रूरत है। भारत में एंटी-एजिंग उत्पादों का तेज़ी से बढ़ता बाज़ार इस सोच का एक पुख्ता प्रमाण है।
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January 7, 2026 at 12:45 AM
दलित विद्यार्थियों के लिए कैंपस क्यों बनते जा रहे हैं असुरक्षित स्थान

हिमाचल प्रदेश की हालिया घटना हमारे समाज की एक कड़वी सच्चाई सामने रखती है। भारत में जातिवाद के कारण एक दलित महिला कहीं ज़्यादा कठिन है। जाति और जेंडर मिलकर ऐसा दबाव बनाते हैं, जिसमें दलित महिलाओं की आवाज़ आसानी से दबा दी जाती है।
दलित विद्यार्थियों के लिए कैंपस क्यों बनते जा रहे हैं असुरक्षित स्थान
हिमाचल प्रदेश की हालिया घटना हमारे समाज की एक कड़वी सच्चाई सामने रखती है। भारत में जातिवाद के कारण एक दलित महिला कहीं ज़्यादा कठिन है। जाति और जेंडर मिलकर ऐसा दबाव बनाते हैं, जिसमें दलित महिलाओं की आवाज़ आसानी से दबा दी जाती है।
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January 7, 2026 at 12:30 AM
मेरा फेमिनिस्ट जॉय: लखनऊ की गलियों से एलएसआर तक मेरी आज़ादी का सफर

स्कूली शिक्षा के दौरान मुझे अपनी शारीरिक बनावट और 'ड्रेसिंग सेंस' के प्रति अच्छा महसूस नहीं होता था। मैंने बचपन से ही बॉडी शेमिंग का सामना किया है, क्योंकि मेरी शारीरिक बनावट हमेशा से ही स्लिम रही है। माता-पिता, रिश्तेदारों और…
मेरा फेमिनिस्ट जॉय: लखनऊ की गलियों से एलएसआर तक मेरी आज़ादी का सफर
स्कूली शिक्षा के दौरान मुझे अपनी शारीरिक बनावट और 'ड्रेसिंग सेंस' के प्रति अच्छा महसूस नहीं होता था। मैंने बचपन से ही बॉडी शेमिंग का सामना किया है, क्योंकि मेरी शारीरिक बनावट हमेशा से ही स्लिम रही है। माता-पिता, रिश्तेदारों और सहपाठियों, किसी ने भी मुझे सकारात्मक अनुभव नहीं कराया।
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January 6, 2026 at 12:46 AM
हिंदी सिनेमा में ट्रांसजेंडर किरदारों के प्रतिनिधित्व की सीमाएं और सच्चाई

आज हिन्दी सिनेमा के 100 से भी ज्यादा साल पूरे हो चुके हैं। लेकिन ट्रांसजेंडर लोगों का जीवन, उनकी समस्याओं, उनकी सामाजिक स्थिति, समाज का उनके प्रति नजरिया, उनके प्रति किए जा रहे अमानवीय व्यवहारों को कभी भी सही तरीके से व्यक्त…
हिंदी सिनेमा में ट्रांसजेंडर किरदारों के प्रतिनिधित्व की सीमाएं और सच्चाई
आज हिन्दी सिनेमा के 100 से भी ज्यादा साल पूरे हो चुके हैं। लेकिन ट्रांसजेंडर लोगों का जीवन, उनकी समस्याओं, उनकी सामाजिक स्थिति, समाज का उनके प्रति नजरिया, उनके प्रति किए जा रहे अमानवीय व्यवहारों को कभी भी सही तरीके से व्यक्त करने की कोशिश नहीं की गई है।
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January 6, 2026 at 12:30 AM